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देश के लिए पदक लेकर लौटी ये खिलाड़ी, बांग्लादेशी रेसलर को 36 सेकंड में हराया था

 दिल्ली की रहने वाली दिव्या काकरन ने 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में शुक्रवार को 68 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती में देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता। दिव्या ने बांग्लादेशी रेसलर शेरीन सुल्ताना को सिर्फ 36 सेकंड में हरा दिया। इस 19 साल की रेसलर की ताकत और तकनीक की तारीफ हुई।

दिव्या का कॉमनवेल्थ गेम्स तक का सफर आसान नहीं रहा। रेसलिंग में आने से पहले दिव्या को दंगल में लड़कों को हराने के लिए जाना जाता था। जब वे कुश्ती में दांव लगाकर इनाम जीत रही होती थीं, उस वक्त उनके पिता स्टेडियम और अखाड़ों के बाहर लंगोट बेच रहे होते थे ताकि बेटी की ट्रेनिंग के लिए पैसे जुटा सकें।

5 साल की उम्र से ही कुश्ती में दिव्या की दिलचस्पी दिखने लगी थी। पिता सूरज खुद भी एक रेसलर बनना चाहते थे, लेकिन उन्हें कभी नामी दंगल या बड़े टूर्नामेंट में खेलने का मौका नहीं मिला। अपने सपने को पूरा करने के लिए वे अपने बेटे को भी रेसलर ही बनाना चाहते थे, लेकिन दिव्या की दिलचस्पी को देखते हुए उन्होंने बेटी को ही रेसलर बनाने की ठानी।

Written by Deepak Chauhan

Deepak Chauhan is a journalist who expertise is writing digital News on Sports & Political , inspirational stories , having 5+ Year experience as a News Article writer,

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