“मुझे न अब कोई राह आसान चाहिए , मुझे अपनी खोई हुई पहचान चाहिए।
क्यों गुजर बसर करना पड़ रहा है मुझे दो वक्त की रोटी के लिए मुझे मेरे बीते वक्त का हिसाब चाहिए। “
जी हां, यह दर्द की पक्तिया है हमारे देश की 7 बार राष्टीय पॉवरलिफ्टिंग स्वर्ण विजेता संतोष कुमारी की। जिन्होंने एक बार नहीं , दो बार नहीं बल्कि 7 बार पॉवरलिफ्टिंग जैसे साहसिक खेल में अपनी काबलियत और अपने जूनून से स्वर्ण पदक हासिल किये।
औरअंतर्राष्टीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाने का फितूर था। पर ट्रेनिंग के दौरान लगी चोट ने संतोष कुमारी के पावरलिफ्टिंग के सपने को सुला दिया। जिसके बाद हरियाणा राज्य की यह बेहतरीन खिलाड़ी गुमनाम हो गयी।
बीतने वक्त के साथ संतोष कुमारी की माली हालत ख़राब होती जा रही थी। संतोष कुमारी ने अपने परिवार का पालन पोषण करने के चाय की दूकान खोल ली। जब यह बात मीडिया के सामने आई तब संतोष कुमारी ने मीडिया बताया की प्रैक्टिस में लगी चोट की वजह से मै पॉवरलिफ्टिंग में फिर वापिस नहीं आ सकी।
मै चाहती हु की सरकार मुझे गोवेर्मेंट नौकरी देने में मदद करे। ताकि मै अपने परिवार को बेहतरीन जिंदगी दे सकू। इस खबर के बार फिल्म अभिनेत्री रवीना टंडन ने मेनका गांधी , सुषमा स्वराज को टवीटर पर टैग करते हुए पीड़ित खिलाड़ी के लिए मदद की गुहार लगाईं है। जिससे मामले की गंभीरता को देखते हुए मेनका गांधी ने खेल मंत्री पीयूष गोयल से मामले में कार्यवाही की गुजारिश की है।
अगर कोई खिलाडी अपने पुरे तन मन धन से देश के लिए कुछ करना चाहता है। और उसी दौरान किसी हादसे का शिकार हो जाता है तो सरकार क्यों अपने स्वार्थ के रवैये को अपना लेती है। इसके लिए सरकार का फर्ज है की अगर कोई खिलाड़ी किसी टूनामेंट या खेल प्रक्टिस के दौरान किसी हादसे का शिकार हो जाता है तो उसे उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए ताकि वह अपने परिवार की और अपनी खुद की जिंदगी को सही तरीके से गुजर बसर कर सके।
क्योकि जो खिलाड़ी अपने देश के लिए जान की बाजी लगाने से भी नहीं डरते , क्या सरकार को उनके या उनके परिवार की सुध नहीं लेनी चाहिए। हमारे लिए इससे ज्यादा शर्म की बात क्या होगी की जो खिलाड़ी हमारे देश की आन , बान शान होते है उनको अपनी जिंदगी बसर करने के लिए कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
Sports Desk Playonindia

