कॉमनवेल्थ गेम्स के सातवें दिन भारत ने सोने पर निशाना लगाया। भारत की डबल ट्रैप शूटर श्रेयसी सिंह ने अपने अचूक निशाने से देश को 12वां गोल्ड मेडल दिलाया। ये पदक सिर्फ देश के लिए ही नही, बल्कि श्रेयसी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। श्रेयसी जिस मकसद के साथ गोल्ड कोस्ट पहुंची थीं, उसमें श्रेयसी कामयाब रहीं।
श्रेयसी का अचूक निशाना
29 साल की श्रेयसी कॉमनवेल्थ गेम्स का ये दिन कभी नहीं भूल पाएंगी। कॉमनवेल्थ खेलों में हिस्सा लेने से पहले उन्होंने खुद से और देशवासियों से जो वादा किया था, उसे पूरा किया। 2010 कॉमनवेल्थ खेलों में श्रेयसी हिस्सा नहीं ले पाई थीं, क्योंकि 2010 जून में उनके पिता दिग्विजय सिंह का ब्रैन हेमरेज के कारण निधन हो गया था, हालांकि उसी साल फरवरी में उन्होंने दिल्ली में कॉमनवेल्थ फेडरेशन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था।