कोरोना वायरस महामारी की वजह से विश्व क्रिकेट पर बेन सा लग गया है। अब ऐसे में टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री भी परेशान है। लेकिन इस पूर्व क्रिकेटर का मानना है कि खिलाड़ियों को ब्रेक के बाद क्रिकेट के दोबारा शुरू होने पर असली चुनौती का सामना करना पड़ेगा। रवि शास्त्री इस बात को चाहते हैं कि दोबारा क्रिकेट शुरू होने पर बीसीसीआई घरेलू क्रिकेट खास करके आईपीएल को सबसे पहले प्राथमिकता दें।

Ravi Shastri Indian cricket coach with staff during the 1st ODI between India and South Africa held at the Himachal Pradesh Cricket Association Stadium, Dharamsala on the 12th February 2020. Photo by Arjun Singh / Sportzpics for BCCI
खिलाड़ियों के लिए होगा बेहद चुनौतीपूर्ण
टाइम्स ऑफ इंडिया ने रवि शास्त्री के हवाले से इस बात को लिखा है कि “चाहे कितना ही बड़ा खिलाड़ी क्यों ना हो फिर से लय में आने में, गेंद को पढ़ने में क्रीज पर अपने पैर को जमाने में उसे समय लगेगा ही लगेगा। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कौन है। यह ना केवल क्रिकेट बल्कि हर खेल के लिए यह बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाला है।
घरेलू क्रिकेट हो पहली प्राथमिकता
रवि शास्त्री चाहते हैं कि “लॉक डाउन के बाद जब खेल शुरू हो तो बीसीसीआई बाकी देशों से पहले घरेलू क्रिकेट को सबसे ज्यादा तवज्जो दें।” शास्त्री ने कहा है कि “मैं फ़िलहाल विश्व टूर्नामेंट पर ज्यादा ध्यान नहीं दूंगा। घर पर रहे पहले घरेलू क्रिकेट की वापसी को सुनिश्चित करें। अंतरराष्ट्रीय और प्रथम श्रेणी हर स्तर का क्रिकेट मैदान पर आएगा और यह इन सबके बीच का बेहद अहम हिस्सा है।”
इसके साथ ही उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि :दूसरी चीज है-बाईलैटरल क्रिकेट। अगर भारत को विश्व कप की मेजबानी बाईलैटरल सीरीज में से किसी एक को चुनना हो तो जाहिर है कि हम बाईलैटरल सीरीज को ही चुनेगे। 15 टीमों को एक जगह लाने से बेहतर होगा कि एक टीम को लाकर पूरी
बाईलैटरल सीरीज सिर्फ एक या दो मैदानों पर खेली जाए।

हालांकि लॉक डाउन होने के कारण भारतीय बोर्ड को सबसे बड़ा नुकसान आईपीएल के रद्द होने के कारण हुआ है। ऐसे में रवि शास्त्री चाहते हैं कि लॉक डाउन खत्म होने के बाद इस टूर्नामेंट को सबसे पहले प्राथमिकता दी जाए। जोकि भारत का घरेलू क्रिकेट सीजन अब लगभग खत्म होने को आया है।
उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि “बाईलैटरल सीरीज के साथ भी यही है। कुछ खास मैदानों पर खेलना और एक विदेशी टीम को मैनेज करना 15 से 16 टीमों की मेजबानी करने से बेहद आसान होता है। आईसीसी को एक बार इस बात पर फिर से विचार करना होगा।


