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हिंदुस्तान की आयरन लेडी

जब पूरा भारत सो रहा था वो इतिहास रच रही थी। जब उसके घर में शादी की शहनाई गूंज रही थी तब वो सुनहरी जीत
की इबारत लिख रही थी। हिंदुस्तान से मीलों दूर अमेरिका में जब पोडियम पर तिरंगा लहराया तो उसकी आंखें नम हो
आईं। ये लम्हा उसके लिए खास था। और इस लम्हें को अपनी गोल्डन कामयाबी से ना सिर्फ खुद के लिए बल्कि पूरे
देशवासियों के लिए खास बनाने वाली थी मणिपुर की आयरन लेडी सैखोम मीरबाई चानू।

मीराबाई चानू ने वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप के 48 किलोग्राम कैटेगरी के महिला वर्ग में रिकॉर्ड 194 किलोग्राम का भार उठाते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया। ये उपलब्धि हासिल करने वाली वो दूसरी भारतीय वेटलिफ्टर हैं। चानू से पहले ओलिंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट कर्णम मल्लेश्वरी ने 1994 और 1995 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में पीला तमगा जीता था।

वर्ल्ड चैम्पियन बनने वाली दूसरी भारतीय होने का गौरव हासिल करने के बाद मीराबाई ने अपनी गोल्डन जीत को अपनी बहन को समर्पित किया है। दरअसल, इसी कामयाबी को हासिल करने की वजह से चानू 22 नवंबर को अपनी बहन की शादी में शामिल नहीं हो पाई थीं।

वर्ल्ड चैम्पियन का ताज मीराबाई के करियर का सबसे अहम पड़ाव है। इससे पहले चानू के नाम 2014 कॉमनवेल्थ खेलों में मिली सिल्वर जीत, उनकी सबसे बड़ी कामयाबी के तौर पर दर्ज थी। 2016 में चानू ने रियो ओलंपिक के लिए भी क्वालिफाई किया लेकिन खेलों का ये महाकुंभ उनके लिए बुरे सपने की तरह साबित हुआ।

लेकिन वो कहते हैं ना जिनके हौसलों में जान होती है वो मुकाम की परवाह नहीं करते। मीराबाई चानू ने भी हार नहीं मानी और रियो ओलंपिक की निराशा को पीछे छोड़ते हुए वर्ल्ड चैम्पियनशिप में रिकॉर्ड जीत के साथ अपनी गोल्डन जीत की स्क्रिप्ट लिखी।

स्पोर्ट्स डेस्क प्रीती शर्मा 

Written by Deepak Chauhan

Deepak Chauhan is a journalist who expertise is writing digital News on Sports & Political , inspirational stories , having 5+ Year experience as a News Article writer,

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