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31 ऑपरेशन,183 टांके.. फिर भी रचा इतिहास !

साल 2016… सितंबर का महीना… जब पूरा भारत नींद की
आगोश में था, वो इतिहास रच रही थी । ब्राजील के रियो में चल रहे पैराओलंपिक खेलों के महिलाओं के शॉटपुट ईवेंट में मेडल जीतने वाली वो भारत की पहली महिला एथलीट बन चुकी थी।अपने हुनर से हिंदुस्तान को गर्व करने का मौका देने वाली इस महिला एथलीट का नाम था दीपा मलिक । दीपा ने रियो पैराओलंपिक में 4.61 मीटर की दूरी तक गोला फेंका और सिल्वर मेडल पर अपनी जीत की मुहर लगाई।

हालांकि, खेलों के महाकुंभ में दीपा की जीत जितनी जानदार थी, इसके पीछे की कहानी उतनी ही दर्दनाक । दरअसल, कमर से नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त होने की वजह से दीपा के लिए कामयाबी का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था।

दीपा के 31 ऑपरेशन किए जा चुके हैं जिसके लिए उनके कमर और पांव के बीच तकरीबन 183 टांके लगे हैं। लेकिन शरीर से विकलांग हुई दीपा मन से नहीं हारी । सेना अधिकारी की पत्नी और दो बच्चों की मां दीपा ने विकलांगता का डटकर मुकाबला किया और कभी भी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।

रियो पैरा ओलंपिक में गोला फेंक के अलावा दीपा ने भाला फेंक और तैराकी में भाग लिया था। दीपा अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में तैराकी में भी पदक जीत चुकी है। इसके अलावा भाला फेंक में उनके नाम एशियाई रिकॉर्ड दर्ज है
जबकि गोला फेंक और चक्का फेंक में उन्होंने 2011 वर्ल्ड चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था।

साल 2012 में दीपा को अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया, जिसे पाने वाली वो सबसे उम्रदराज खिलाड़ी हैं । साल 2017 में खेल रत्न पुरस्कार के लिए दीपा मलिक के नाम पर भी चर्चा हुई, जिसे हासिल ना कर पाने का उन्हें थोड़ा मलाल है।

playonindia

Written by Deepak Chauhan

Deepak Chauhan is a journalist who expertise is writing digital News on Sports & Political , inspirational stories , having 5+ Year experience as a News Article writer,

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