स्टार फॉरवर्ड, कमाल की ड्रैग फ्लिकर और जबरदस्त स्पीड… कमाल की बात है कि ये सारी खूबियां एक ही खिलाड़ी की हैं,जिसका नाम है रानी रामपाल। अब जरा दूसरी कमाल की बात जान लीजिए ।13 साल बाद जिस भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशिया का खिताब अपने नाम किया, उसकी कमान संभालने वाली भी रानी रामपाल ही थी। दरअसल, ये दोनों ही कमाल रानी के उस जिद की बदौलत है जो उसने चौथी क्लास में की थी।
रानी जब चौथी क्लास में थी तो उसने स्कूल के ग्राउंड में लड़कियों को हॉकी खेलते देखा ।उन्हें खेलते देख उसके मन में भी हॉकी खेलने की जिद घर कर गई। बस यहीं से शुरू हुआ एक तांगेवाली की बेटी का भारतीय हॉकी की रानी बनने का सफर । दरअसल, तांगा चलाकर किसी तरह गुजर बसर करने वाले रानी के पिता अपनी बेटी के जिद के आगे बेबस हो गए । हार मानकर वो रानी को हॉकी कोच बलदेव सिंह के पास ले गए, जिन्होंने रानी की प्रतिभा को निखारते हुए उसे इस लायक बनाया कि वो भारत ही नहीं बल्कि वर्ल्ड स्टेज पर भी नाम कमा सके।
सिर्फ, 13 साल की उम्र में भारतीय टीम का हिस्सा बनी रानी को अब इंटरनेशनल टर्फ पर हॉकी खेलते 9 साल पूरे हो चुके हैं। इस दौरान वो जूनियर और सीनियर लेवल पर कई बड़े अवॉर्ड जीत चुकी है। साल 2010 में 15 की उम्र में रानी महिला विश्व कप खेलने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनी। अपने दमदार प्रदर्शन के दम पर रानी ने रेलवे में क्लर्क की नौकरी हासिल की। अपनी कामयाबियों से उसने खुद की पहचान तो बनाई ही साथ ही परिवार की जिंदगी भी संवारी। उसके पिता अब तांगा चलाना छोड़ चुके हैं। उसका घर अब आलीशान हो चुका है। और, ये सब मुमकिन हुआ है हॉकी की वजह से।
रानी को भारतीय हॉकी ने काफी कुछ दिया है। अब बारी है उसे रिटर्न करने की। अपनी कप्तानी में भारत को एशिया का चैम्पियन बनाकर और इस खिताबी जीत के साथ अगले साल होने वाले विश्व कप का टिकट दिलाकर रानी ने आधी अमानत भारतीय हॉकी को लौटा दी है। अब आधी वो अपनी लाजवाब कप्तानी में भारतीय महिला हॉकी टीम को 2018 विश्व कप का विजेता बनाकर लौटाना चाहती है। ये काम थोड़ा मुश्किल जरूर है पर नामुमकिन नहीं है। स्वभाव से जिद्दी रानी को भी इसका अच्छे से इल्म है। तो ,तैयार रहिएगा 2018 में रील वाली नही बल्कि रियल वाली चक दे इंडिया, लाइव देखने के लिए।
स्पोर्ट्स डेस्क प्रीती शर्मा


