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मेजर ध्यानचंद को हाकी का जादूगर क्यों कहा जाता है

क्रिकेट के मैदान में जो रुतवा सर डॉन ब्रैडमैन का है,हॉकी के मैदान में वही नाम और रुतबा मेजर ध्यान चंद्र का माना जाता है। मेजर ध्यान चंद्र भारत की हॉकी टीम के एक बेहद ही प्रतिष्ठित खिलाड़ी रहे हैं। इन्हें हॉकी का जादूगर नाम की भी संज्ञा दी गई है।

मेजर ध्यान चंद्र के बारे में ऐसा कहा जाता है कि जब भी यह मैदान पर उतरते थे तो मानो गेंद इनकी हॉकी स्टिक से हमेशा चिपकी ही रहती थी शायद यही कारण था कि उन्होंने अपने पूरे कैरियर में करीब 1000 से ज्यादा गोल दागने में कामयाब हुए ।मेजर ध्यान चंद्र के खेल मेजर ध्यान चंद्र के द्वारा खेल में किए गए इतने अहम योगदान के कारण ही भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण के सम्मान से सम्मानित किया था।

मेजर ध्यान चंद्र का खेल देख कर के सारे हॉकी के प्रशंसक उनके मुरीद हो जाते थे। मेजर ध्यान चंद्र के बारे में बहुत सारी बातें प्रचलित है। एक बार ऐसा लगा था कि मेजर ध्यान चंद्र की स्टिक में चुंबक आदि लगा हुआ रहता है जिसकी वजह से गेंद उनके स्टिक के आसपास ही चिपकी रहती है।
जिसके बाद इस शंका के समाधान करने हेतु उनकी स्टिक स्टिक को तोड़ कर के देखा गया था लेकिन उसमें किसी भी तरीके को चुंबक आदि नहीं मिला था बर्लिन में खेले गए ओलंपिक के दौरान भी ऐसे ही संख्या में उठी थी और उसमें यह शंका की गई थी कि मेजर ध्यान चंद्र के हॉकी स्टिक में गोंद लगा होता है।

जिसकी वजह से उनकी गेंद के स्टिक पर चिपकी रहती है लेकिन जांच करने पर फिर भी कुछ नहीं पाया गया था निश्चित तौर पर मेजर ध्यान चंद्र के खेल में कुछ तो ऐसी बात थी जो ना सिर्फ दर्शक और हॉकी के प्रेमी बल्कि प्रतिद्वंदी टीम के सदस्य भी उनकी कलाकारी को बस देखते ही रह जाते थे और उन्हें कुछ भी समझ नहीं आता था।

उस जमाने का एक क्रूर शासक हिटलर भी मेजर ध्यान चंद्र के खेल का बहुत बड़ा प्रशंसक था और उनको जर्मनी की तरफ से खेलने का आग्रह भी किया था लेकिन मेजर ध्यान चंद्र ने उस आग्रह को ठुकरा दिया और भारत की तरफ से ही खेलना जारी रखा। मेजर ध्यान चंद्र के प्रशंसक बहुत ज्यादा थे क्रिकेट के दुनिया के महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन भी मेजर ध्यानचंद के खेल के बहुत बड़े प्रशंसक थे।

मेजर ध्यान चंद्र और डॉन ब्रैडमैन की एक बार मुलाकात हुई थी जब भारत की टीम ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर गई थी। इस पूरे दौरे में ध्यान चंद्र ने 48 मैचों में 201 गोल दागे थे जिसके बाद डॉन ब्रैडमैन ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह किसी हॉकी खिलाड़ी ने की है या किसी बल्लेबाज ने।

मेजर ध्यान चंद्र तीन बार ऐसी भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा है जिस ने ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता था। इस टीम ने 1928 1932 और 1936 में गोल्ड मेडल जीता था।मेजर ध्यान चंद्र का खेल के क्षेत्र में इतना अभूतपूर्व योगदान की वजह से ही उनकी जन्म तिथि को राष्ट्रीय खेल दिवस के तौर पर मनाया जाता है।

SPORTS DESK PLAYONINDIA


Written by Deepak Chauhan

Deepak Chauhan is a journalist who expertise is writing digital News on Sports & Political , inspirational stories , having 5+ Year experience as a News Article writer,

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