आदित्य प्रकाश
हैम्बर्ग,जर्मनी मे चल रहे विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप मे भारतीय मुक्केबाज गौरव बिधूड़ी ने कांस्य जीत कर इतिहास रच दिया है। ऐसा कारनामा करने वाले गौरव चौथे भारतीय मुक्केबाज हैं
। ज्ञात हो कि इससे पहले सिर्फ विजेंद्र सिंह (2009), विकास कृष्णन (2011) और शिव थापा (2015) ही विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप मे कांस्य जीत सके हैं। वाइल्ड कार्ड से विश्व चैंपियनशिप मे जगह पाने वाले भारतीय मुक्केबाज ने टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल मे बिलेल मोहम्मद को पटखनी दी और कांस्य पक्का किया, हालांकि वह सेमीफाइनल मे अपने 20 वर्षीय प्रतिद्वंद्वी से हार गए औऱ फाइनल मे जगह नहीं बना पाये।
गौरव के लिए ये जीत अहम रही, क्योंकि दिल्ली के इस 24 वर्षीय मुक्केबाज के लिए ये सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा, कमर की चोट और करीबी मुकाबले हारने से विश्व चैंपियनशिप से पहले गौरव बिधूड़ी का आत्मविश्वास टूट चुका था।
56 किग्रा वर्ग के ये मुक्केबाज अपने बार-बार क्वार्टर फाइनल मे हार की वजह से भी भारतीय खेमे मे काफी चर्चित रहे हैं। पुछे जाने पर गौरव कहते हैं कि जब मुझे वाइल्ड कार्ड के बारे में पता चला तो मैं हर कोच से पूछता रहा कि क्या यह सही है। मैंने सभी से पूछा और सबने जब कह दिया कि हां ये सच है तो मैंने चैन की सांस ली।
मैच के बाद, गौरव ने अपने बार-बार क्वार्टर फाइनल मे हारने को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा मैं हर टूर्नामेंट में क्वार्टर फाइनल में हार गया। यहां भी क्वार्टर फाइनल तक पहुंचा तो नकारात्मक सोच मुझ पर हावी होने लगी कि कहीं फिर ऐसा न हो जाए। लेकिन फिर मुझे लगा कि मैं यह मिथक तोड़ सकता हूं। एक खिलाड़ी के लिए दिमाग पर काबू रखना बहुत मुश्किल होता है। मेरे दिमाग में हर तरह के विचार आ रहे थे। कुछ सकारात्मक
थे तो कुछ नकारात्मक भी। मेरे दिमाग में बहुत शोर था जिससे
सिर्फ मैं ही सुन सकता था।
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