“जो अपने कदमों की काबिलियत पर भरोसा रखते हैं वह अक्सर अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं. इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है हम वह सब कुछ कर सकते हैं जो हम सोच सकते हैं” यह कुछ चंद लाइन आज श्रीलंकाई टीम के लिए बहुत ही उपयुक्त साबित होती हैं. विश्व क्रिकेट में यदि श्रीलंका का कद और वर्तमान स्थान देखे तो दोनों अलग अलग है.
श्रीलंका टीम एक ऐसी टीम रही है, जिसने विश्व क्रिकेट में काफी अच्छा खासा नाम कमाया है,और विश्व चैंपियन भी बनी है. लेकिन यदि वर्तमान टीम की बात की जाए तो यह टीम कुछ बुरे दौर से जरूर गुजर रही है. टीम के कई सीनियर खिलाड़ियों ने संयास ले लिया है जिसके बाद टीम नए-नए प्रतिभाओं को खोजने में जुटी हुई है. लेकिन कहते हैं ना कि शेर कितना भी बूढ़ा हो जाए शेर तो आखिर शेर ही रहता है. यही बात श्रीलंका की टीम के लिए भी सच साबित हो रही है. श्रीलंका की टीम ने हाल ही में एक ऐसा कारनामा किया है जो किसी भी एशियाई टीम ने अभी तक नहीं किया है. ऐसा करने वाली वह एशिया की पहली टीम बन गई है.
इस समय श्रीलंका की टीम दक्षिण अफ्रीका की धरती पर दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेल रही है. जिसके पहले मैच का समापन हो चुका है. श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेला गया पहला टेस्ट मैच एक बहुत ही ऐतिहासिक मैच साबित हुआ. इस मैच के ऐतिहासिक होने की मुख्य वजह यह रही कि श्रीलंका की टीम ने इस मैच में चेज करते हुए 300 से ज्यादा रन का आंकड़ा पार किया और जीत हासिल की.
श्रीलंका की टीम को 304 रनों का लक्ष्य हासिल हुआ था जिसका पीछा करते हुए श्रीलंका के टीम ने 1 विकेट से जीत दर्ज की. अब आप सोच रहे होंगे कि 304 रन का लक्ष्य का पीछा करना कोई शायद ज्यादा बड़ी बात नहीं होगी, लेकिन इसके पीछे की पूरी कहानी जानने के बाद आपको निश्चित ही श्रीलंका के टीम पर गर्व महसूस होगा. श्रीलंका की टीम एशिया की पहली ऐसी टीम है जिसने न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका में चौथी पारी में 300 से ज्यादा रनों का लक्ष्य का पीछा करते हुए जीत दर्ज की.
श्रीलंका की इस जीत के हीरो बने हैं कि कुसाल परेरा, जिन्होंने नाबाद 153 रन की पारी खेली. इस मैच की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इस पूरे मैच के आखिरी पारी के दौरान श्रीलंका के टीम हमेशा ही बैकफुट पर नजर आई. शुरुआती 5 विकेट श्रीलंका के 110 रन के स्कोर पर ही गिर गए थे. जिसके बाद छठवे विकेट के लिए 80 से ज्यादा रनों की पार्टनरशिप हुई लेकिन छठवां विकेट गिरते ही विकेट के गिरने का सिलसिला एक बार शुरू हुआ और जो जाकर के नौवें विकेट के साथ ही थमा.
श्रीलंका ने अपने 9 विकेट 226 रन के स्कोर पर ही गवा दिए थे. उसके बाद श्रीलंका को जीत के लिए 78 रनों की जरूरत थी. वही साउथ अफ्रीका को जीत के लिए सिर्फ एक विकेट की जरूरत थी. यदि कोई छोटा सा बच्चा भी जो क्रिकेट की थोड़ी बहुत समझ रखता हो ऐसी परिस्थिति देखने के बाद अमूमन बिना सोचे समझे यही कहेगा कि इस परिस्थिति के बाद साउथ अफ्रीका ही विजेता बनेगी क्योंकि साउथ अफ्रीका की पिच तेज गेंदबाजों को बहुत सपोर्ट करती हैं, और आखिरी विकेट के तौर पर इतने रन कभी भी नही बने थे.
लेकिन जो हुआ वह बिल्कुल इसके उलट हुआ कुसाल परेरा ने आखरी बल्लेबाज के साथ मिलकर बहुत ही सूझबूझ भरे अंदाज से बल्लेबाजी की और टीम को आखिरी मुकाम तक ले गए. इस दौरान परेरा ने बहुत ही समझदारी से बल्लेबाजी की और स्ट्राइक को ज्यादा से ज्यादा अपने पास ही रखा,ताकि कि 11 में नंबर का बल्लेबाज साउथ अफ्रीका के तेज गेंदबाजों के सामने आने से बच सके.
परेरा ने अपने इंटरव्यू के दौरान कहा कि उन्हें अपनी जीत पर पूरा भरोसा था क्योंकि उन्हें पता था कि उन्होंने जीत के लिए जरूरी होमवर्क किया हुआ है. वहीं इस शानदार मैच के समापन के बाद साउथ अफ्रीका के कप्तान ने कहा कि यह एक बहुत ही शानदार मैच था और टेस्ट क्रिकेट के जीवन के लिए ऐसे मैच का होना बहुत जरूरी है.